ज्वालिया सती माताजी और कुलदेवी वरोठ माताजी की आरती / वंदना

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||वरोठ माताजी की आरती ||

वंदो वरोठ माता - वंदो वरोठ माता |
कुम्भलगढ़ की महालक्ष्मी; सबकी भाग्य विधाता ||
शंख चक्र त्रिशूल खड्ग कर ; धनुष बाण धारी |
चंद्रमुखी माँ गदा पद्य ले ; सिंह पर करे सवारी || (१) वंदो ...
सिंध हुई हो दया की मूर्ति ; भक्तो की त्राता |
भव भय हारिणि अभय दान दो ; हो मंगल दाता || (२)
रत्नजटित वस्त्राभूषण माँ ; अंग तेरे सोहे |
मुकुट मणि और हार मोती के ; कुण्डल मन मोहे ||३|| वंदो
गणेश शारदा ऋषिमुनि जन ; महिमा करे बखान |
पूर्ण रूप से शेषनाग भी ; गा न सके गुणगान ||४|| वंदो
तेरे चरण की किरणों से माँ ; सूरज यश गाता |
संकट रोग शत्रु नाशनी ; हो जग विख्याता ||५|| वंदो
राणाजी को शस्त्र बनाने ; दिया पीतल भण्डार ||६|| वंदो
धनरेचा हुआ वैश्य पितल्या ; हो उस कुल की माता |
वीर वृत्ति हो जाता ; जो द्वार तेरे आता ||७|| वंदो
धन धान्य और धरा धर्म को ; हो देने वाली |
आयु कीर्ति यश बल संगे ; वंश की रखवाली ||८|| वंदो
स्वर्ण कलश से मंदिर साजे ; धर्म ध्वजा लहरावे ||
विणा ताल मृदंगा साथ ; राग छतीसो गावे ||९|| वंदो
रात दिन हम करे वंदना ; जापे तुम्हारा नाम |
हिरे मोती जैसी चमके ; माँ तुमसे रतलाम ||१०|| वंदो
पूजा की विधि ज्ञात नै हे ; दया करो महारानी |
कुंकुं अक्षत चन्दन केसर ; और चुनरिया धानी ||११|| वंदो
शीश छत्र तेरे चवर ढुलाए ; वाघेश्वरी माता |
नर नारी सब करे आरती ; पावे सुख साता ||१२|| वंदो

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|| सतीमाताजी की आरती ||

ॐ जय सतीमाता . ओ मैया जय जय सतीमाता |
भक्त पितल्या माता का , निष् दिन गुण गाता ||
ओ मैया निशदिन गुण जाता
सेठ वाघोजी की लालबाई , तुम थी पटरानी |
मोखनदा की महासतीकी , महिमा जग जानी ||
ओ मैया महिमा जग जानी
असाढ़ सुदी तिथि एकम को जागा वैश्य तमाम |
जल कलश में ज्योति जगे , चला ज्वलिया ग्राम ||
ओ मैया चला ज्वलिया ग्राम
दूज को दार्शन पाने को माँ , हम आए तुम्हारे धाम |
धुप दीप और भोग लगा कर जपे तुम्हारा नाम ||
ओ मैया जपे तुम्हारा नाम
ना बांधेंगे घर का पालना , ना पायल घुंघराली |
पालेंगे हम वचन तुम्हारा , माँ तुम हो रखवाली ||
ओ मैया तुम हो रखवाली
सूत कभी न काटेंगे , ना काला वस्त्र धारे |
रबर की चुडिया न पहनेंगे , ना पीला वस्त्र ओढे ||
ओ मैया ना पीला वस्त्र ओढेा
सती माता की आरती जो कोई जन गावे |
कहत केशरी माता से , मनवांशित फल पावे ||
ॐ जय- जय सतीमाता
ॐ जय सतीमाता , ओ मैया जय - जय सतीमाता |
वैश्य पितल्या माता का , निश दिन गुण गाता
ओ मैया निश दिन गुण गाता

|| वरोठ माताजी की आरती/अरज ||

मारो बेड़ो लगाईं दीजो पार, कुम्भल गडरा माताजी
दुनिया में धारो पर्चो भारी
महिमा अपरम्पार, कुम्भल गडरा माताजी| (१) मारो..
देश देशो रा जातरू आवे
करता जय जयकार, कुम्भल गडरा माताजी| (२) मारो..
पितलिया बंधू तारा सभी गुण गावे - २
उतरे भवजस पार, कुम्भल गडरा माताजी| (३) मारो..
मंगलकारी वरोठ माताजी
तीन भुवननि करतारी, कुम्भल गडरा माताजी| (४) मारो..
पितलिया मंडल सभी गुण गाया
सफल हुओं रतन नो अवतार कुम्भल गडरा माताजी| (५) मारो..

|| वरोठ माताजी की बधाई ||

मारी वरोठ माताजी बधाई बाजे छे
मारी सती माताजी बधाई बाजे छे
शहनाई सिल नौबत बाजे
और घनन घन गाजे छे
मारी वरोठ माताजी बधाई बाजे छे |
नर नारी मिल मंगल गावे
मोतियन चौक पुरावे छे
मारी वरोठ माताजी बधाई बाजे छे |
निल गगन में चंदा बिराजे
मधुर रहवा लहराई रे
मारी वरोठ माताजी बधाई बाजे छे |
रतन माताजी से अर्ज करत है
चरणों की सेवा प्यारी लागे छे
मारी वरोठ माताजी बधाई बाजे छे |

|| आरती श्री लक्ष्मीजी की||

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

|| आरती श्री गणेशजी की||

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ x2
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी। x2
(माथे पर सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी)
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
(हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा)
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥ x2
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अँधे को आँख देत कोढ़िन को काया
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया। x2
'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ x2
(दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी )
(कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी॥)
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

|| आरती श्री सरस्वती माताजी की||

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता॥
चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
जय सरस्वती माता॥
बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥
जय सरस्वती माता॥
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
जय सरस्वती माता॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥
जय सरस्वती माता॥
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
जय सरस्वती माता॥
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारी ज्ञान भक्ति पावे॥
जय सरस्वती माता॥
जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता॥