पितलिया वंश के वशिष्ट गौरव

श्रीमती शांताबाई पितलिया

|| काकीसा का परिचय ||

संपूर्ण जीवन जिसने न्यौशावर कर दिया उन्हें आज रतलाम में ही नहीं भारत भर में काकीसा के नाम से जाना जाता है |
काकीसा पर माताजी की असीम कृपा है |
स्वयं के दर्दो की परवाह किये बिना वे दुसरो के दुःख दर्दो को मिटाने की चाह रखती है |
काकीसा बड़ी ही ममता मए है | उन्हें ६२ वर्षो से माताजी के भाव आते है |
माताजी के आदेश से उन्होंने मंदिर निर्माण , भोजनशाला , धर्मशाला के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है |
इनके आदेशनुसार पूर्व में भी युग महोत्सव व् पितलिया सम्मलेन मनाया गया है |